
[Verse 1] लोग कहते हैं मुझको पागल गिनते हैं मेरी सारी खामियाँ हँसते हैं मेरे टूटे सपने पर मैं चुपचाप गिनूँ साँसें कामियाँ दिन कटते हैं जैसे जंग लगे चाकू हर बात चुभती है अंदर तक दिल कहे भाग जा सब छोड़कर कदम अटकें पर चलता रहूँ बस [Chorus] मैं बस सर्वाइवर हूँ टूटा हूँ पर जिंदा हूँ धूप से जला हूँ मैं फिर भी यहीं खड़ा हूँ मैं बस सर्वाइवर हूँ खामोशी में गाता हूँ लोग जो भी कहते हैं उनसे ऊपर उठता हूँ (ओह) [Verse 2] रातों को छत गिनता रहता सोचूँ क्यों इतना जलते हैं मेरी छोटी सी हँसी पर भी कितनी नज़रें पलटते हैं शायद खुद से खफा हैं सब मुझमें अपनी कमी तलाशें मैंने सीख लिया है अब उत्तर में दुआ ही बाँटें [Chorus] मैं बस सर्वाइवर हूँ टूटा हूँ पर जिंदा हूँ धूप से जला हूँ मैं फिर भी यहीं खड़ा हूँ मैं बस सर्वाइवर हूँ अपने ही सहारा हूँ कल क्या होगा जाने दो आज भी अगर उठा हूँ… [Bridge] हारा नहीं थका हुआ हूँ राहा नहीं रुक सा गया हूँ पर दिल के कमरे के कोने में एक छोटा उजाला जलता है [Chorus] मैं बस सर्वाइवर हूँ टूटा हूँ पर जिंदा हूँ कल का डर सीने में फिर भी आगे बढ़ता हूँ मैं बस सर्वाइवर हूँ मेरे ज़ख्म ही कवच हैं लोग क्या कहेंगे जाने दो मुझे तो बस जीना है

