[Intro] जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर। जय बजरंगबली महाराज, करो भक्तों के सब काज॥ [Chorus] आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ [Verse 1] जाके बल से गिरिवर काँपे, रोग-दोष निकट न झाँके। अंजनि पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई॥ राम नाम में जिनका वासा, भक्तों का तुम ही विश्वास। संकट हरते पल में आकर, भर दो जीवन प्रेम उजागर॥ [Chorus] आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ [Verse 2] लंका जारि सिया सुधि लाये, रघुनाथ का संदेश सुनाये। सागर लाँघे पल भर में ही, भक्ति की महिमा जग को बताये॥ लक्ष्मण के प्राण उबारे, संजीवनी पर्वत ले आये। रामकाज में तन मन अर्पित, सेवा का आदर्श दिखाये॥ [Chorus] आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ [Bridge] जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो गुरुदेव की नाईं। राम लखन सीता मन बसिया, भक्त हृदय में ज्योति जगाईं॥ [Final Chorus] आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ [Outro] पवन तनय संकट हरन, मंगल मूर्ति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भ 🚩 श्री हनुमंत स्तुति एवं आरती 🚩 ॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥ मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयुथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥ आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ जाके बल से गिरवर काँपे । रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई । संतन के प्रभु सदा सहाई ॥ आरती कीजै हनुमान लला की ॥ दे वीरा रघुनाथ पठाए । लंका जारि सिया सुधि लाये ॥ लंका सो कोट समुद्र सी खाई । जात पवनसुत बार न लाई ॥ आरती कीजै हनुमान लला की ॥ लंका जारि असुर संहारे । सियाराम जी के काज सँवारे ॥ लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे । लाये संजीवन प्राण उबारे ॥ आरती कीजै हनुमान लला की ॥ पैठि पताल तोरि जमकारे । अहिरावण की भुजा उखारे ॥ बाईं भुजा असुर दल मारे । दाहिने भुजा संतजन तारे ॥ आरती कीजै हनुमान लला की ॥ सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें । जय जय जय हनुमान उचारें ॥ कंचन थार कपूर लौ छाई । आरती करत अंजना माई ॥ आरती कीजै हनुमान लला की ॥ जो हनुमानजी की आरती गावे । बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥ लंक विध्वंस किये रघुराई । तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥ आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ ॥ इति संपूर्णम् ॥