
(मतला (opening couplet) दिल अपने का हाल तुझसे कहें कैसे सनम, हर पल तेरी याद में हम रहें कैसे सनम। ⸻ दिल के अंदर आज भी हलचल सी उठती है, इस दिल में तूफ़ान छुपा है, सहें कैसे सनम। ⸻ जिस्म में दर्दों का जैसे एक समंदर है, तेरे बिन ये ज़ख्म भला अब भरें कैसे सनम। ⸻ तुमसे जो वादा किया था निभा न पाए हम, इस बोझ-ए-वादा को दिल से हटाएँ कैसे सनम। ⸻ तुमको दर्द ने घेरा ऐसे, पास जाकर उसका हाल हम लें कैसे सनम। ⸻ पैसे से हर चीज़ खरीदी नहीं जाती है, तुम्हारे प्यार का ये सौदा करें कैसे सनम। रिश्तों में जो प्यार था, अब वो रहा ही कहाँ, इन सूखे जज़्बातों को फिरसे जगाएँ कैसे सनम। ⸻ दिल की ये खिड़कियाँ खोलें तो डर लगता है, तुझको इस दिल में बसा कर रहें कैसे सनम। हाल-ए-दिल आज तुझे खोल के दिखा दें हम, इन छुपे अरमानों को अब दबाएँ कैसे सनम।

