
ASMD अजमेर बुला रहा है... चलो दीवानो चलो
[Intro] अजमेर बुला रहा है... चलो दीवानो चलो... [Hook] अजमेर बुला रहा है... चलो दीवानो चलो... अरे चलो दीवानो... अजमेर बुला रहा है... धड़कन में ताल बाँधे, कदमों में बेकरारी, ख़्वाजा के दीवानों की, सजने लगी सवारी। या ख़्वाजा... या ख़्वाजा... [Verse] बढ़ते ही गए क़दम तो, मंज़िल भी मुस्कुराई। अजमेर की उस राह ने, हर रूह को बुलाया। जिस दर पे झुक गई नज़र, किस्मत वहीं सँवर गई। तेरे दर की ख़ाक क्या मिली, रूह मेरी निखर गई। [Chorus] अजमेर बुला रहा है... चलो दीवानो चलो... हक़ ख़्वाजा... हक़ ख़्वाजा... [Verse] रौज़ा-ए-ग़रीब नवाज़, रहमत का है समंदर। आया जो बनके मुफ़लिस, लौटा वो बन सिकंदर। यहाँ देगों में महकती है, दुआओँ की रौशनी। तेरी एक निगाह-ए-लुत्फ़ से, मिट गए सारे भरम। [Chorus] दरबार बुला रहा है... चलो दीवानो चलो... भर दो झोली... या ख़्वाजा... [Verse] रजब का चाँद चमका, सूफ़ी धमाल जागी। रूहों के इस सफ़र में, हर ज़र्रा झूम उठा। जन्नती दरवाज़े से गुज़रे, तो ये एहसास हुआ। ख़्वाजा के दर की एक झलक, सदियों का सफ़र बन गई। [Bridge] अली मौला... ग़रीब नवाज़... ख़्वाजा जी... सुल्तान-ए-हिन्द... या ख़्वाजा... ख़्वाजा पिया... या ख़्वाजा... [Chorus] इरादे रोज़ बनते हैं, मगर टूट जाते हैं। अजमेर वही आते हैं, जिन्हें ख़्वाजा बुलाते हैं। या ख़्वाजा... या ग़रीब नवाज़... [Outro] मेरे ख़्वाजा... मेरे सरकार... अजमेर... बुला रहा है... [End] या... ख़्वाजा...

