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RBSM प्रेमानंद गुरु की वाणी में राधा नाम

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प्रेमानंद गुरु की वाणी में राधा नाम समाया, वृंदावन की पावन धरा पर प्रेम का दीप जलाया। राधे-राधे जपते-जपते, भाव सागर लहराया, प्रेमानंद गुरु की वाणी में राधा नाम समाया॥ सादा जीवन, निर्मल चितवन, मुख पर मधुर मुस्कान, राधा रस में डूबे रहते, जैसे विरले संत महान। वाणी से अमृत झरता है, हर दिल को समझाया, प्रेमानंद गुरु की वाणी में राधा नाम समाया॥ कहते हैं वो प्रेम ही साधन, प्रेम ही सच्चा मार्ग, राधा नाम से कटे बंधन, मिट जाए हर भार। छोड़ो झूठा अहंकार सब, बस नाम जपाया, प्रेमानंद गुरु की वाणी में राधा नाम समाया॥ राधा रानी करुणा सागर, दीनन की रखवाली, जो शरण में आए उनके, भर दें झोली खाली। गुरु बताते राधा बिन जग, सूना-सूना छाया, प्रेमानंद गुरु की वाणी में राधा नाम समाया॥ वृंदावन की रज में बसकर, प्रेम सुधा बरसाते, हर सत्संग में राधा रस के, मोती मुक्त बिखराते। जो भी सुन ले भाव से, जीवन धन्य बनाया, प्रेमानंद गुरु की वाणी में राधा नाम समाया॥ कहते मन को राधा में डुबो, वहीं मिले विश्राम, राधा ही शक्ति, राधा ही भक्ति, राधा ही परम धाम। उनके चरणों की छाया में, सब दुख दूर भगाया, प्रेमानंद गुरु की वाणी में राधा नाम समाया॥ गूँजे वृंदावन की गलियों में, राधे-राधे ध्वनि, प्रेमानंद गुरु संग जपें हम, मिटे भवसागर घनी। राधा नाम ही प्राण हमारा, यही सत्य समझाया, प्रेमानंद गुरु की वाणी में राधा नाम समाया॥