
(laash ke chhilke, haath mein chillum) (Remix)
[intro - haiku] धुंध में सरगम, शवों की चाल टेढ़ी, ढोलक गूंगी है। [tanka - build] शाम के धागे, झूलते हैं राखों पर — खून की गंध को याद करते हैं वो नाक जो कभी सांस नहीं लेती। [hook - tanka] ढोल की गहराई, तंत्र-मंत्र की माया — चीखें, जलते फूल, नाच रही है वो परछाई, जिसके पाँव कभी थे ही नहीं। [drop - haiku] टूटी तंबूरा, कांपता सरंगी स्वर, कब्र से निकली। [verse - tanka] शहर की नसों में बहती है साँपों की सीटी और बूँद — गूंज रहा है जलता काँच, माथे पर तिलक बिखरा। [bridge - haiku] धागों की माला, कानों में बसी आँधी, पायल टूट गई। [second hook - tanka] अंधी शहनाई, सरगम का भूत बोले — “कब्रों के भीतर हँसती हैं वो सारी लाशें जिनकी चीखें बेआवाज़।” [second drop - haiku] माटी में लिपटी कंप्रेस्ड आत्मा काँपे — धुन बनी जहर। [outro - tanka] नाम नहीं कोई, ध्वनि बनी वह स्मृति है — एक काजल बूँद, जो सपनों में गिरती है और नींद को सड़ा देती।

