
- - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - Musicmattersyay© - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - www.suno.com/@musicmattersyay - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - (Instrumental Intro) (Flute and Soft Drums) (Verse 1) तुम कहाँ से आई हो, इस शहर को रंग जो चढ़ाई हो। तुम जो इतने सारे सपने संजो लाई हो, ये देख के, हमें भी चौकाई हो। (Instrumental Solo) (Chorus) हम सबको चौकाई हो, इस शहर को जन्नत तुम जो बनायीं हो। (Instrumental Solo) (Verse 2) इन गहरी आँखों में हज़ारों उम्मीदें, जो सजाई हो, मुट्ठी में अनगिनत खूबियां लाई हो। लेकिन दिल में इतना दर्द, जो छुपाई हो, उसे खुशियों के सागर में समाई हो। (Instrumental Solo) (Chorus) हम सबको चौकाई हो, इस शहर को जन्नत तुम जो बनायीं हो। (Instrumental Solo) (Verse 3) चाहे जो योगदान, तुम शहर को दो। चाहे जितनी भी मेहनत, तुम यहाँ करो। फिर भी अपना घर ही तो संसार है, शहर का तुम्हें इस बात पर , सलाम है। (Chorus) हम सबको चौकाई हो, इस शहर को जन्नत तुम जो बनायीं हो। (Instrumental Solo) (Verse 4) कश्मीर की घाटी से हो, या बंगाल की खाड़ी से। असम के बागानों से, या हिमालय के पहाड़ों से। हर कोई भी जो इस शहर में आए हैं, उनपे हमें नाज़ है, अरे आपकी क्या बात है। (Chorus) हम सबको चौकाई हो, इस शहर को जन्नत तुम जो बनायीं हो। (Bridge) तुम्हारे बिना ऐसा लगे, जैसे चीनी बिना फीका दूध हो। तुम जो लाई इतनी मिठास, इस शहर का तुम्हें, बहुत ही आभार हो। (Chorus) हम सबको चौकाई हो, इस शहर को जन्नत तुम जो बनायीं हो। (Instrumental Solo) (Outro) इस शहर को जन्नत, तुम जो बनायीं हो। इस शहर को जन्नत, तुम जो बनायीं हो। (Fadeout) [END]

