
वृंदावन के वृक्ष को, मर्म ना जाने कोई... डाल-डाल और पात-पात पर, श्री राधे-राधे होए... श्री राधा वृषभानु नंदिनी, मेरी जीवन प्राण, अंत समय ब्रजवास हो, बस इतना दो अरमान। राधे मैं मरूं ब्रज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए... राधे मैं मरूं ब्रज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए। तेरी रज माथे पे हो... [Pause] और प्राण निकल जाए, राधे मैं मरूं ब्रज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए। ब्रज की पावन धूली में, मेरा तन मिल जाए, तेरे चरणों की दासी, ये आत्मा कहलाए। मुझे और ना कुछ भी सूझे, बस तू ही तू दिख जाए... राधे मैं मरूं ब्रज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए। कालिंदी के घाट पर, जब आए अंतिम शाम, होठों पे मेरी लाडो, बस तेरा ही हो नाम। यमुना की लहरों में, मेरा जीवन बह जाए... राधे मैं मरूं ब्रज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए। राधे मैं मरूं ब्रज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए... तेरी रज माथे पे हो, और प्राण निकल जाए। गोवर्धन की तलहटी और संतों का हो संग, मेरी रूह पे चढ़ जाए, तेरी भक्ति वाला रंग। परिक्रमा करते-करते, ये शरीर शांत हो जाए... गहवर वन की कुंज में, मेरा छूटे जब ये प्राण, मुझे लेने को आएं खुद मेरे श्री भगवान। तेरी मोर कुटी के साए, मुझे अपने में छुपाए... राधा कुंड के नीर सा, पावन हो मेरा अंत, मुझे दर्शन दे जाएं, ब्रज मंडल के सब संत। मेरे पाप जन्म-जन्म के, उसी पल में धुल जाएं... ब्रज के सरोवर तीर पे, मेरा पंछी बन हो वास, मैं जन्म-जन्म तक रखूं, बस तेरे दर की आस। चाहे बनूं कदम की डाली, जो तेरे काम आ जाए... श्वास-श्वास में हो श्यामा... और कोई ना हो नाम, मेरी अंतिम हिचकी आए... [Pause] और तेरा दर्श मिल जाए... राधे मैं मरूं ब्रज में, कुछ ऐसी कृपा हो जाए, तेरी रज माथे पे हो, और प्राण निकल जाए। श्री राधा... श्री राधा... श्री राधा... श्री राधा... राधा राधा राधा राधा...श्री राधा... जय श्री राधा...

