
HOOK बंसी बजाए नंदलाल, राधा बैठी-बैठी ताके, मुरली की मीठी तान, मनवा कान्हा-कान्हा jaape। VERSE 1 यमुना किनारे शाम सुहानी, चाँद भी देखे छवि निराली, Bansi ki jab जब धुन ये छेड़े, झूम उठे ब्रज की हर गली। पायल बोले छन-छन-छन, हवा भी प्रेम की खुशबू बाँटे, बंसी बजाए नंदलाल, राधा बैठी-बैठी ताके। VERSE 2 मोर मुकुट सिर पे सजे है, मुख पे मुस्कान प्यारी, पीतांबर की छटा निराली, देखे दुनिया सारी। मुरली की धुन मन को भाए, सारे दुख पल में मिट जाएँ, राधा नाम जो प्रेम से लेवे, कान्हा उसके पास ही आए। बंसी बजाए नंदलाल, राधा बैठी-बैठी ताके। VERSE 3 बरसाने से आई राधा, मन में बसाए श्याम, वृंदावन की गलियों में गूँजे, राधे-राधे नाम। प्रेम की डोरी ऐसी बाँधी, छूटे ना ये नाte, बंसी बजाए नंदलाल, राधा बैठी-बैठी ताके, राधा बैठी-बैठी ताके।

