
[Intro: Slow Melodic Harmonium and Deep Alaap] कश्ती में मेरी आके समंदर सिमट गया, लेते ही नाम ख्वाजा का तूफान हट गया । ये तो ख्वाजा का करम है, मेरे ख्वाजा का करम है । हक मुईन, या मुईन! हक मुईन, या मुईन! । [Chorus: Catchy Hook - Start Clapping] चलो रे देखेंगे चिश्ती बहार, मेरे ख्वाजा से मिलने की रुत आई । दिल को मिलेगा करार, मेरे ख्वाजा से मिलने की रुत आई । चलो रे देखेंगे चिश्ती बहार, मेरे ख्वाजा से मिलने की रुत आई । [Verse 1: The Sultan of Hind] सारे हिंदुस्तान में ख्वाजा तुम जैसा धनवान नहीं है, तुम जैसा कोई सुल्तान नहीं है । कोई राजा है, कोई महाराजा है, पर मेरे ख्वाजा जैसा कोई इंसान नहीं है । निर्धन जो दर पे आए तो धनवान हो गए, जितने भिखारी आए वो सुल्तान हो गए । मानवता की तुम मूरत हो, तुम जैसा कोई महान नहीं है । [Taqraar: Repeat for Energy] सारे हिंदुस्तान में ख्वाजा! (तुम जैसा धनवान नहीं है) हिंद के राजा ख्वाजा! (तुम जैसा धनवान नहीं है) [Verse 2: The Humble Servant] सुनकर ये शोहरत आया हूं, मुझे नौकर रख लो, मुझे नौकर रख लो । दर-दर का मैं ठुकराया हूं, सख्त मुसीबत का मारा हूं । ला के अना सागर से पानी, रोज वजू का हौज भरूंगा । आपके दर के हर खादिम को, मैंने शाहों से बढ़कर पाया है । मुझे नौकर रख लो ख्वाजा, मुझे नौकर रख लो । [Bridge: Universal Peace] हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, सबकी विनती सुनते हैं ये । मुश्किल चाहे जैसी भी हो, उसको हल कर देते हैं ये । रहमत बरस रही है अजमेर की गली-गली में । जन्नत सिमट गई है अजमेर की गली में । [Verse 3: The Malang (High Energy - Fast Pace)] जिस दिन से चढ़ गया मेरे दिल पे ये रंग, मैं तो ख्वाजा का मलंग, मैं तो ख्वाजा का मलंग । दुश्मन तू मेरे कत्ल का मंसूबा मत बना, ताज मैंने पहना है ख्वाजा के नाम का । मेरी झोपड़ी में ख्वाजा का तसव्वुर जरूर है, इसी बात का तो मुझको गुरूर है । बेशक मेरे नसीब पे मुझको गुरूर है । [Hook 2: The Festive Vibe] दूल्हा बने हैं ख्वाजा मुईनुद्दीन, बहन हुसैनी ताज रे । अजमेर की जमीन पे नूरानी शमा है, वलियों का काफिला यहाँ जमा है । ये है ख्वाजा की नगरिया, जरा धीरे चलो री, बरसे रहमत की बदरिया, जरा धीरे चलो री । खाली भर देंगे गगरिया, जरा धीरे चलो री । [Climax: Building to Final Peak] निस्बत लाई है तेरे दर पे ख्वाजा, मुरादे पूरी कर दे । भर दे तू भर दे, मेरी खुशियों से झोली तू भर दे । जो दे उसका भी भला, जो ना दे उसका भी भला । ख्वाजा पिया का दीवाना, अजमेर में ये कहता चला । [Outro: Fade out with Chants] पहुंचा बुलंदियों पे मुकद्दर का सितारा, जब से मिला है ख्वाजा दर का सहारा । हक मुईन... या मुईन... । मेरे ख्वाजा... मेरे ख्वाजा... । (Soft Harmonium and Claps fade out)

